22 सनकादि का उपदेश

 जब तक अंतःकरण रूप उपाधि रहती है,तभी तक पुरुष को जीवात्मा, इंद्रियों के विषय और इन दोनों का संबंध कराने वाले अहंकार का अनुभव होता है;इसके बाद नहीं।।28

 बाह्य जगत में भी देखा जाता है कि जल्, दर्पण आदि निमित्तों के रहने पर ही अपने बिंब और प्रतिबिंब का भेद दिखाई देता है; अन्य समय नहीं।।29

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